कभी यूँ ही …..।“😍
कभी यूँ ही किसी की वो मीठी मुस्कराहट देखने के लिए उसे याद करना,

कभी यूँ ही किसी की प्यार भरी बातों को याद करना,

कभी यूँ ही किसी के साथ बिताए लम्हों को याद करना,

कितना अच्छा लगता है ना…।

कभी यूँ ही उसके लिए गुन-गुनाना,

कभी यूँ ही उसके लिए भगवान से कोई दुआ करना,

कभी यूँ ही उसके लिए किसी की बातों को नजर-अंदाज़ करना,

कितना अच्छा लगता है ना…।😍
कभी यूँ ही उसके भेजे हुए Messages पढ़ना,

कभी यूँ ही उसकी आवाज़ सुन लेना,

कभी यूँ ही उसकी वो Dimple वाली  फोटो देख लेना,

कितना अच्छा लगता है ना…।😍
कभी यूँ ही उसके गाल चुम लेना,

कभी यूँ ही उसे बाँहों में भर लेना,

कभी यूँ ही उसके कन्धों पर सर टिका देना,

कितना अच्छा लगता है ना…।😍
कभी यूँ ही उसे चिढाना,

कभी यूँ ही उस से रूठ जाना,

कभी यूँ ही उसका फिर से मनाना,

कितना अच्छा लगता है ना…।😍
कभी यूँ ही उसके लिए कुछ लिखना,

कभी यूँ ही उसके बारे में सोचना,

कभी यूँ ही बस उसका हो जाना,

कितना अच्छा लगता है ना…।😍

प्रितेश ( PBM )

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