एक आवाज  ” भ्रुण हत्या ” के खिलाफ :

आदमी खुद को कभी यूँ भी सजा देता है ;

रोशनी के लिए शोलोँ को हवा देता है ।

खून के दाग दामन पे लग जाते है ;

निर्दय आदमी उन सब को भुला देता है ॥

मिलती जब खुशी तो सब बताया जाता है ;

दुःख मे लोगो से सब कुछ छिपाया जाता है ।

क्युँ अत्याचार नन्ही जान पर ये करता है ;

दुनिया देखने से पहले सुला देता है ।

सोचता हूँ हमेशा पाप क्युँ ये होता है ;

पूत्र के लिए वो पूत्री को सजा देता है ।

कैसा न्याय इस अदालत मे होता है ;

दिल के टुकङे को कैसी वो सजा देता है ॥

पापी पाप करके खूब मजे लेता है ;

दुनिया भर का दर्द माँ को वो देता है ॥

कितने प्यार से माँ बच्चे को पालती है ;

एक ही पल मे बेटी को माँ से छीन लेता है ॥

एक चिँगारी है जो दिलो मे जगाना चाहता हूँ ;

इन हत्याओं को जङ से मिटाना चाहता हूँ ;

देश मे हूँ शांति की लहर दौङाना चाहता हूँ ।

ना रंगो हाथ इन पापी कामो मे;

देखो देश कैसे फिर प्रगति करता है ।

Advertisements